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TRIVENI TYPING MANSAROVAR COMPLEX CHHINDWARA MOB-7089973746

created Thursday February 05, 11:30 by TRIVENITYPING


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आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में, जहॉं हम अपनी शारीरिक बनावट और सुख-सुविधाओं पर अत्‍यधिक ध्‍यान देते हैं, वहीं एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण पहलू अक्‍सर छूट जाता हैं, - वह है हमारा “मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य” विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संघटन के अनुसार, स्‍वास्‍थ्‍य का अर्थ केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णत: स्‍वस्‍थ होना है। मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति  केवल अपनी क्षमताओं का सही उपयोग कर पाता है, बल्कि वह जीवन के सामान्‍य तनावों का सामना करने और समाज में योगदान देने में भी सक्षम होता है। मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य हमारे भावनात्‍मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्‍याण को दर्शाता है। यह प्रभावित करता है कि हम कैसे सोचते हैं, महसूस करते हैं और कार्य करते हैं। यह इस बात काे भी निर्धारित करता है  कि हम तनाव को कैसे संभालते हैं, दूसरों के साथ कैसे संबंध बनाते हैं और जीवन में  सही चुनाव कैसे करते हैं। बचपन से लेकर किशोरावस्‍था और व्‍यस्‍‍कता तक, जीवन के हर चरणों में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य का महत्‍व बना रहता हैं। मानसिक समस्‍याओं के पीछे कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि यह कई कारकों का मिश्रण हो सकता हैं। इसमें आनुवांशिक कारण, मस्तिष्‍क में रासायनिक असंतुलन, जीवन के कठिन अनुभव जैसे कि आघात, दुर्व्‍यवहार या किसी प्रियजन को खोना शामिल है। इसके अलावा, आज के दौर में सोशल मीडिया का अत्‍यधिक प्रभाव, प्रतिस्‍पर्धा की भावना, अकेलापन और अस्‍वस्‍थ जीवनशैली भी मानसिक तनाव के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य बिगड़ने के संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है। यदि कोई व्‍यक्ति सामान्‍य से अधिक उदास रहता है, उसे नींद कम या बहुत ज्‍यादा आती है, वह लोगों से कटने लगा है, या उसकी ऊर्जा के स्‍तर में भारी गिरावट आई है, तो ये चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा अत्‍यधिक गुस्‍सा, अधिक चिड़चिड़ापन और उन गतिविधियों में रूचि खो देना जो पहले पसंद थीं, मानसिक अस्‍वस्‍थता की ओर इशारा करते हैं। गंभीर स्थितियों में व्‍यक्ति को भ्रम होना या आत्‍म-नुकसान के विचार भी सकते हैं। हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहॉं शारीरिक चोट    दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर के पास जाया जाता है, लेकिन मानसिक परेशानी होने पर उसे 'पागलपन' छिपाया जाता है। इस सामाजिक शर्म के कारण लोग मदद मांगने से डरते हैं। हमें यह समझने की आवश्‍यकता है कि मानसिक बीमारी भी उतनी ही सामान्‍य है जितनी की बुखार या मधुमेह। जब तक हम इस विषय पर खुलकर बात नहीं करेंगे, तब तक प्रभावित व्‍यक्तियों को सही उपचार मिलना मुश्किल होगा। मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ रहने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाए जा सकते है:- अपने मन की बात किसी भरोसेमंद मित्र या परिवार के सदस्‍य से साझा करें। संवाद मानसिक बोझ को कम करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। नियमित व्‍यायाम और योग केवल शरीर को फिट रखते है,बल्कि मस्तिष्‍क मे 'एंडोर्फिन' जैसे अच्‍छे हार्मोन भी छाेड़ते हैं, जिससे मूड  बेहतर होता है। अच्‍छी नींद मस्तिष्‍क को पुनर्जीवित करती है। दिन में कम से कम 6-8 घंटे की नींद अनिवार्य है। सोशल मीडिया की आभाषी दुनिया से बाहर निकलकर वास्‍‍तविक दुनिया और प्रकृति के साथ समय बिताएं। यदि स्थिति आपके नियंत्रण से बाहर लग रही है, तो किसी पेशेवर काउंसलर या मनोचिकित्‍सक की सलाह लेने में कतई संकोच करें। निष्‍कर्षत: मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य कोई विलासिता नहीं बल्कि एक आवश्‍यकता है। एक स्‍वस्‍थ मस्तिष्‍क ही एक स्‍वस्‍थ समाज और राष्‍ट्र का निर्माण कर सकता है।
नोट:- यह लेख साकेत साखरे के द्वारा टंकित किया गया हैं।

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