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केंद्रीय बजट
created Wednesday February 04, 03:57 by Brajesh99
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जहां बजट 2025 में ज्यादातर आयकर के दरों और स्लैब में छूट पर जोर दिया गया था, वहीं बजट 2026 में बड़े बदलाव वाले कदम नहीं उठाए गए हैं। इसके बजाय अलग-अलग क्षेत्रों और मुद्दों पर आधारित उपायों के जरिए अपनाए गए इसके बिखरे हुए तरीकों को जब मिलाकर एक साथ देखा जाता है, तो इसका मकसद मध्यम अवधि में देश के विकास को आगे बढ़ाना नजर आता है। जिस किस्म की भू-आर्थिक और भू-राजनैतिक अनिश्चितताओं का सामना भारतीय अर्थव्यवस्था कर रही है, उसके मद्देनजर यह फैला हुआ तरीका लक्षित बड़े एलानों के मुकाबले कहीं ज्यादा कारगर नीति साबित हो सकती है। यह और ज्यादा गड़बड़ी का वक्त नहीं है। बजट 2026 में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र और अलग-अलग सेवा क्षेत्रों के लिए घोषणाओं के साथ-साथ वस्त्र और चमड़ा जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों की मदद के लिए भी खास प्रावधान हैं। मैन्यूफैक्चरिंग के मामले में, इस बजट में सोच-समझकर चुने गए सात क्षेत्रों - बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ), रसायन (केमिकल्स), पूंजीगत सामान और वस्त्र - को शामिल किया गया है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें सरकार की मौजूदा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं से फायदा हुआ है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत बढ़ाया गया आवंटन इसी दिशा में सही कदम हैं। ये दोनों ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की जरूरत है। बायोफार्मा शक्ति योजना का मकसद अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ भारत को वैश्विक स्तर का एक बायोफार्मा मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना है। फार्मास्यूटिकल्स, जो पहले से ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत अच्छा प्रदर्शन करता है, को अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ से छूट मिली हुई है। लेकिन उन क्षेत्रों की मदद करना भी जरूरी है जो फिलहाल इन टैरिफों से प्रभावित हैं। पिछले बजट में घोषित राष्ट्रीय निर्यात संवर्धन मिशन को वित्तीय वर्ष के नौ महीने बीत जाने के बाद, दिसंबर 2025 में ही लागू किया जा सका था।
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