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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस
created Yesterday, 14:13 by starone
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र, 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड में उत्तर-प्रदेश की झांकी एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बनी है। इस वर्ष उत्तर-प्रदेश ने अपनी झांकी के माध्यम से राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और 24.5 प्रतिशत की औसत औद्योगिक विकास दर के अद्भुत संगम को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय 'बुंदेलखंड की विरासत और आधुनिक प्रगति' रखा गया है। झांकी के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने कुल 30 राज्यों के प्रस्तावों में से उत्तर-प्रदेश का चयन किया। राज्य के कला और संस्कृति विभाग के 120 से अधिक शिल्पकारों ने पिछले 95 दिनों तक अथक परिश्रम किया ताकि 15 मीटर लंबी इस झांकी के माध्यम से उत्तर-प्रदेश की बदलती छवि को वैश्विक पटल पर रखा जा सके। बुंदेलखंड के विकास के लिए आवंटित 8,500 करोड़ रुपये के बजट की झलक भी इसके आधुनिक मॉडलों में स्पष्ट दिखाई देती है। झांकी के सबसे अग्रभाग में बांदा जिले में स्थित अजेय कालिंजर किले की एक भव्य प्रतिकृति बनाई गई है। यह किला अपनी वास्तुकला और अदम्य साहस के लिए इतिहास में प्रसिद्ध है। किले के ऊपर लहराते ध्वज और उसके पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी उत्तर-प्रदेश के प्राचीन वैभव की याद दिलाती है। इसके साथ ही, झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड के प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कराए गए हैं, जो क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक जड़ों का प्रतीक है। झांकी की भव्यता को बढ़ाने के लिए उसके चारों ओर लोक कलाकारों का एक समूह पारंपरिक 'पाय-डंडा' नृत्य प्रस्तुत कर रहा है, जो अपनी चपलता और ऊर्जा के लिए जाना जाता है। कलाकारों की वेशभूषा और वाद्य यंत्रों की ध्वनि कर्तव्य पथ पर एक जीवंत वातावरण निर्मित कर रही थी। इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिकता और भविष्यवादी सोच है। झांकी के पिछले हिस्से में 'बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर' के तहत विकसित हो रही ब्रह्मोस मिसाइल के मॉडल को प्रदर्शित किया गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि जो बुंदेलखंड कभी सूखे और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, आज वह देश की सैन्य शक्ति का केंद्र बन रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उत्तर-प्रदेश में रक्षा उत्पादों का निर्माण न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को भी मजबूत कर रहा है। झांकी में 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत झाँसी के खिलौनों और
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र, 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड में उत्तर-प्रदेश की झांकी एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बनी है। इस वर्ष उत्तर-प्रदेश ने अपनी झांकी के माध्यम से राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और 24.5 प्रतिशत की औसत औद्योगिक विकास दर के अद्भुत संगम को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय 'बुंदेलखंड की विरासत और आधुनिक प्रगति' रखा गया है। झांकी के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने कुल 30 राज्यों के प्रस्तावों में से उत्तर-प्रदेश का चयन किया। राज्य के कला और संस्कृति विभाग के 120 से अधिक शिल्पकारों ने पिछले 95 दिनों तक अथक परिश्रम किया ताकि 15 मीटर लंबी इस झांकी के माध्यम से उत्तर-प्रदेश की बदलती छवि को वैश्विक पटल पर रखा जा सके। बुंदेलखंड के विकास के लिए आवंटित 8,500 करोड़ रुपये के बजट की झलक भी इसके आधुनिक मॉडलों में स्पष्ट दिखाई देती है। झांकी के सबसे अग्रभाग में बांदा जिले में स्थित अजेय कालिंजर किले की एक भव्य प्रतिकृति बनाई गई है। यह किला अपनी वास्तुकला और अदम्य साहस के लिए इतिहास में प्रसिद्ध है। किले के ऊपर लहराते ध्वज और उसके पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी उत्तर-प्रदेश के प्राचीन वैभव की याद दिलाती है। इसके साथ ही, झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड के प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कराए गए हैं, जो क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक जड़ों का प्रतीक है। झांकी की भव्यता को बढ़ाने के लिए उसके चारों ओर लोक कलाकारों का एक समूह पारंपरिक 'पाय-डंडा' नृत्य प्रस्तुत कर रहा है, जो अपनी चपलता और ऊर्जा के लिए जाना जाता है। कलाकारों की वेशभूषा और वाद्य यंत्रों की ध्वनि कर्तव्य पथ पर एक जीवंत वातावरण निर्मित कर रही थी। इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिकता और भविष्यवादी सोच है। झांकी के पिछले हिस्से में 'बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर' के तहत विकसित हो रही ब्रह्मोस मिसाइल के मॉडल को प्रदर्शित किया गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि जो बुंदेलखंड कभी सूखे और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, आज वह देश की सैन्य शक्ति का केंद्र बन रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उत्तर-प्रदेश में रक्षा उत्पादों का निर्माण न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को भी मजबूत कर रहा है। झांकी में 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत झाँसी के खिलौनों और
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