Text Practice Mode
Hindi Typing Matter JJA Exam 2024 shift 2
created Today, 07:05 by Shashank1
0
300 words
55 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
एक जमाव जो आरंभ में विधि अनुकूल हो, अपने सदस्यों के पश्चातवर्ती कार्य द्वारा विधि विरूद्ध जमाव में परिवर्तित हो सकता है। धारा 141 भारतीय दण्ड संहिता के साथ संलग्न स्पष्टीकरण में यह उपबंध है कि ‘’कोई जमाव जो इकट्ठा होते समय विधि विरूद्ध नहीं था, बाद में विधि विरूद्ध जमाव हो सकेगा।‘’ अत: महत्वपूर्ण यह है कि क्या आपराधिक कृत्य के समय पांच या अधिक व्यक्ति धारा 141 भारतीय दण्ड संहिता में यथा उल्लेखित उद्देश्य के लिए एकत्रित थे। सामान्य आशय की तरह सामान्य उद्देश को भी प्रमाणित करने के लिए प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किया जाना अत्यंत कठिन है। अत: इस संबंध में कोइ्र निष्कर्ष प्रत्येक मामले की सुसंगत परिस्थितियों के आधार पर उद्भूत होताहै। संयुक्त विचारण में कुछ अभियुक्तों के संबंध में साक्ष्य विश्वसनीय न होने से अथवा उनकी अनन्यता स्थापित न होने के कारण दोषमुक्त हो जाने से यदि अभियुक्तगण की संख्या पांच से कम हो जाती है तब भी धारा 149 भारतीय दण्ड संहिता के आधार पर आन्वयिक उत्तरदायित्व हेतु दोषिता सुनिश्चित करने में वैधानिक बाधा नहीं है, यदि साक्ष्य से यह युक्तियुक्त संदेह से परे स्थापित हो कि कुछ अन्य व्यक्ति, नामित या अनामित, सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में विधि विरूद्ध जमाव के सदस्य थे। इसके अतिरिक्त धारा 34 भारतीय दण्ड संहिता का उपबंध साक्ष्य का एक नियम है। अत: यदि ऐसे मामलों में प्रमाणित तथ्यों से यह स्थापित होता है कि आपराधिक कृत्य सामान्य आशय के अग्रसरण में किया गया था तो अभियुक्त को धारा 34 के प्रभाव से आन्वयिक उत्तरदायित्व के आधार पर दोषसिद्ध किया जा सकता है तथा तद्आधार पर धारा 149 भारतीय दण्ड संहिता के स्थान पर धारा 34 के प्रभाव से दोषसिद्धि को परिवर्तित भी किया जा सकता हैं, परन्तु ऐसे निष्कर्षों पर पहुंचने के लिये अभियुक्त की प्रतिरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव के तथ्य पर विचार अवश्यमेव अपेक्षित है।
saving score / loading statistics ...