Text Practice Mode
साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Today, 05:35 by Sai computer typing
3
540 words
116 completed
5
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
एक बार कृष्ण और बलराम किसी जंगल से गुजर रहे थे। चलते-चलते काफी समय बीत गया और अब सूरज भी लगभग डूबने वाला था। अधेरे में आगे बढ़ना संभव नहीं था, इसलिए कृष्ण बोले, बलराम हम ऐसा करते हैं कि अब सुबह होने तक यहीं ठहर जाते हैं, भोर होते ही हम अपने गंतव्य की और बढ़ चलेगे। बलराम बोले पर इस घने जंगल में हमें खतरा हो सकता हैं, यहा सोना उचित नहीं नहीं होगा, अच्छा हम ऐसा करते हैं कि पहले मैं सोता हूं और तब तक तुम पहरा देते रहो, और फिर जैसे ही तुम्हें नींद आये तुम मुझे जगा देना, तब मैं पहरा दूंगा और तुम सो जाना। कृष्ण ने सुझाव दिया। बलराम तैयार हो गए। कुछ ही पलों में कृष्ण गहरी नींद में चले गए और तभी बलराम को एक भयानक आकृति उनकी और आती दिखी, वो कोई राक्षस था। राक्षस उन्हें देखते ही जोर से चीखा और बलराम बुरी तरह डर गए। इस घटना का एक विचित्र असर हुआ- भय के कारण बलराम का आकर कुछ छोटा हो गया और राक्षस और विशाल हो गया और पुन: बलराम डर कर कांप उठे, अब बलराम और भी सिकुड़ गए और राक्षस पहले से भी बड़ा हो गया।
राक्षस धीरे-धीरे बलराम की और बढ़ने लगा, बलराम पहले से ही भयभीत थे, और उस विशालकाय राक्षस को अपनी और आता देख जोर से चीख पड़े- कृष्णा और चीखते ही वहीं मूर्छित हो कर गिर पड़े। बलराम की आवाज सुन कर कृष्ण उठे, बलराम को वहां देख उन्होंने सोचा कि बलराम पहरा देते-देते थक गए और सोने से पहले उन्हें आवाज दे दी।
अब कृष्ण पहरा देने लगे। कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा। कृष्ण जरा भी घबराय नही और बोले, बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो, क्या चाहिए तुम्हे? कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ गया ओर राक्षस का आकर कुछ घट गया। राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उससे डर नहीं रहा था। घबराहट में वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा। इस बार भी कृष्ण नहीं डरे और उनका आकर भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया। एक आखिरी प्रयास में राक्षस पूरी ताकत से चीखा पर कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, बताओं तो क्या चाहिए तुम्हे। फिर क्या था राक्षस सिकुड़ कर बिलकुल छोटा हो गया और कृष्ण ने उसे हथेली में लेकर अपनी धोती में बांध लिया कुछ ही देर में सुबह हो गयी कृष्ण ने बलराम को उठाया और आगे बढ़ने के लिए कहा वे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे तभी बलराम उत्तेजित होते बोले, पता है कल रात में क्या हुआ था, एक भयानक राक्षस हमें मारने आया था। रूको-रूको बलराम को बीच में ही टोकते हुए कृष्ण ने अपनी धोती में बंधा राक्षस निकाला और बलराम को दिखाते हुए बोले कहीं तुम इसकी बात तो नहीं कर रहो हो। हां ये वही है। पर कल जब मैंने इसे देखा था तो ये बहुत बड़ा था, ये इतना छोटा कैसे हो गया? बलराम आश्चर्यचकित होते हुए बोले। कृष्ण बोले, जब जीवन में तुम किसी चीज से बचने की कोशिश करते हो जिसका तुम्हे सामना करना चाहिए तो वो तुमसे बड़ी हो जाती है और तुम पर नियंत्रण करने लगती है।
राक्षस धीरे-धीरे बलराम की और बढ़ने लगा, बलराम पहले से ही भयभीत थे, और उस विशालकाय राक्षस को अपनी और आता देख जोर से चीख पड़े- कृष्णा और चीखते ही वहीं मूर्छित हो कर गिर पड़े। बलराम की आवाज सुन कर कृष्ण उठे, बलराम को वहां देख उन्होंने सोचा कि बलराम पहरा देते-देते थक गए और सोने से पहले उन्हें आवाज दे दी।
अब कृष्ण पहरा देने लगे। कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा। कृष्ण जरा भी घबराय नही और बोले, बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो, क्या चाहिए तुम्हे? कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ गया ओर राक्षस का आकर कुछ घट गया। राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उससे डर नहीं रहा था। घबराहट में वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा। इस बार भी कृष्ण नहीं डरे और उनका आकर भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया। एक आखिरी प्रयास में राक्षस पूरी ताकत से चीखा पर कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, बताओं तो क्या चाहिए तुम्हे। फिर क्या था राक्षस सिकुड़ कर बिलकुल छोटा हो गया और कृष्ण ने उसे हथेली में लेकर अपनी धोती में बांध लिया कुछ ही देर में सुबह हो गयी कृष्ण ने बलराम को उठाया और आगे बढ़ने के लिए कहा वे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे तभी बलराम उत्तेजित होते बोले, पता है कल रात में क्या हुआ था, एक भयानक राक्षस हमें मारने आया था। रूको-रूको बलराम को बीच में ही टोकते हुए कृष्ण ने अपनी धोती में बंधा राक्षस निकाला और बलराम को दिखाते हुए बोले कहीं तुम इसकी बात तो नहीं कर रहो हो। हां ये वही है। पर कल जब मैंने इसे देखा था तो ये बहुत बड़ा था, ये इतना छोटा कैसे हो गया? बलराम आश्चर्यचकित होते हुए बोले। कृष्ण बोले, जब जीवन में तुम किसी चीज से बचने की कोशिश करते हो जिसका तुम्हे सामना करना चाहिए तो वो तुमसे बड़ी हो जाती है और तुम पर नियंत्रण करने लगती है।
saving score / loading statistics ...