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साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Yesterday, 05:39 by lucky shrivatri
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अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की योजना फलीभूत होती है तो निश्चित ही डिजिटल दुनिया में भारत की बड़ी उपलब्धि होगी। अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करना महज तकनीक का बेहतर इस्तेमाल ही नहीं होगा, बल्कि इससे देश के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों को गति मिलेगी। यह भारत को तकनीकी रूप से महाशक्तियों की श्रेणी में भी खड़ा करेगा। यह पहल इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि अभी तक उपग्रहों के माध्यम से सिर्फ डेटा कलेक्शन का काम हो पाता है। इन डेटा को प्रोसेसिंग के लिए पृथ्वी पर स्थित ग्राउण्ड स्टेशनों पर भेजना होता है।
उम्मीद की जा रही है कि अंतरिक्ष में ही संवेदनशील डेटा प्रोसेस हो जाएंगे तो साइबर हमले और डेटा चोरी जैसे खतरों को कम किया जा सकेगा। दुनिया में तेज व सुरक्षित डेटा की मांग के बीच कई प्रतिष्ठित टेक कंपनियां अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने के प्रयासों में जुटी हैं। ये प्रयास इसलिए भी जरूरी समझे जा रहे हैं क्योंकि पृथ्वी पर बने डेटा सेंटर न केवल साइबर हमलों बल्कि भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में भी प्रभावित हो सकते है। इसीीलिए प्रमुख टेक कंपनियां इसे भविष्य की डिजिटल सुरक्षा का बेहतर माध्यम मान रही है। कहा यह भी जा रहा है कि उपग्रह डेटा सेंटर इंटरनेट और क्लाउड सेवाओं की गति व पहुंच दोनों को मजबूती देगे। इसरो ने जो योजना तैयार की है वह एज कम्यूटिग पर आधारित होगी। इसका आशय यह है कि डेटा का विश्लेषण स्त्रोत के पास ही हो। सब जानते हैं कि डेटा को पृथ्वी पर भेजने में समय तो लगता ही है, अत्यधिक ऊर्जा भी खत्म होती है। हालांकि इसरों ने इस दिशा में अभी काम की शुरूआत ही की है। ऐसे में आने वाली चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। बड़ी चुनौती यह भी है कि युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में यदि डेटा प्रोसेसिंग में देरी हुई तो नुकसानदेह साबित हो सकती है।
उम्मीद की जा सकती है कि इसरों का यह मिशन भारत को वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी विश्लेषण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई नई उपलब्धियां दिलाने वाला होगा।
उम्मीद की जा रही है कि अंतरिक्ष में ही संवेदनशील डेटा प्रोसेस हो जाएंगे तो साइबर हमले और डेटा चोरी जैसे खतरों को कम किया जा सकेगा। दुनिया में तेज व सुरक्षित डेटा की मांग के बीच कई प्रतिष्ठित टेक कंपनियां अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने के प्रयासों में जुटी हैं। ये प्रयास इसलिए भी जरूरी समझे जा रहे हैं क्योंकि पृथ्वी पर बने डेटा सेंटर न केवल साइबर हमलों बल्कि भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में भी प्रभावित हो सकते है। इसीीलिए प्रमुख टेक कंपनियां इसे भविष्य की डिजिटल सुरक्षा का बेहतर माध्यम मान रही है। कहा यह भी जा रहा है कि उपग्रह डेटा सेंटर इंटरनेट और क्लाउड सेवाओं की गति व पहुंच दोनों को मजबूती देगे। इसरो ने जो योजना तैयार की है वह एज कम्यूटिग पर आधारित होगी। इसका आशय यह है कि डेटा का विश्लेषण स्त्रोत के पास ही हो। सब जानते हैं कि डेटा को पृथ्वी पर भेजने में समय तो लगता ही है, अत्यधिक ऊर्जा भी खत्म होती है। हालांकि इसरों ने इस दिशा में अभी काम की शुरूआत ही की है। ऐसे में आने वाली चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। बड़ी चुनौती यह भी है कि युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में यदि डेटा प्रोसेसिंग में देरी हुई तो नुकसानदेह साबित हो सकती है।
उम्मीद की जा सकती है कि इसरों का यह मिशन भारत को वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी विश्लेषण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई नई उपलब्धियां दिलाने वाला होगा।
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