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नारा चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, वहाँ के पहले मुख्यमंत्री बने और वह वर्ष 2014 से इस पद को संभाल रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू ने वर्ष 1994 से लेकर वर्ष 2004 तक संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया है। वर्तमान में, चंद्रबाबू नायडू तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष हैं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में नायडू ने अपनी पार्टी को एक जबरदस्त जीत दिलाने में पार्टी का नेतृत्व किया था, क्योंकि उनकी पार्टी टीडीपी 175 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल हुई थी। लोकसभा चुनाव में भी टीडीपी-बीजेपी पार्टी, गठबंधन के साथ क्षेत्र में सबसे अधिक मतों की गणना के साथ उभर कर सामने आई थी। शानदार नेतृत्व कौशल और राजनीति में रुचि की वजह से उन्हें, स्थानीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनने का अवसर प्राप्त हुआ था। चंद्रबाबू नायडू के राजनीतिक जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब उन्होंने वर्ष 1978 में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी। नायडू केवल 28 वर्ष की आयु में विधायक (एमएलए) बने, बल्कि वह एपी मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री भी बनने में कामयाब हुए।
 
एक उभरते हुए नेता के रूप में नायडू को तकनीकी शिक्षा और सिनेमेटोग्राफी (छायांकन) का पोर्टफोलियो दिया गया था। वर्ष 1980 में नायडू की राजनीतिक ताकत और बढ़ गई थी, क्योंकि नायडू ने एनटीआर के नाम से मशहूर एक प्रतिष्ठित तेलगू फिल्म कलाकार नंदमुरी तारक रामा राव, जो बाद में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, उनकी दूसरी बेटी भुवनेश्वरी से शादी कर ली थी।
 
वर्ष 1994 में राज्य में अपने शासनकाल के दौरान, नायडू ने कार्यशीलता की एक प्रबंधकीय शैली के साथ खुद तकनीकी समझ रखने वाले मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था। चंद्रबाबू नायडू राज्य के लिए “विजन 2020” के साथ आए और उन्होंने घोषणा की कि उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री की बजाय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में पहचाना जाए।
 
उनके दृष्टिकोण के आलेख के मुताबिक, 2020 तक आंध्र प्रदेश एक नव-परिवर्तित राज्य होगा और इस परिवर्तन में सूचना प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष रूप से, उसमें नायडू ने हैदराबाद को सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र में तब्दील करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई थी। इन योजनाओं में से कई योजनाओं को उन्होंने, आठ वर्षों में मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होते हुए लागू किया था। नायडू की छवि एक कर्मनिष्ठ सीईओ की है और वह अपने कार्यालय में कंप्यूटरों से डेटा विश्लेषण और उसके अनुसार काम करते हैं।
 
चंद्रबाबू नायडू को विश्व बैंक में एक सलाहकार के रूप में शामिल किया गया था। विदेशी नेताओं के कहने पर, उन्होंने नई दिल्ली के बाद हैदराबाद को अपना दूसरा ठिकाना बना लिया था। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी उनकी सराहना की। इनके कामों की वजह से कई संस्थाओं और आईटी कंपनियों ने हैदराबाद या जिसे कभी-कभी “साइबराबाद” भी कहा जाता था, में अपनी दुकानें स्थापित कर दी थीं।
 
वर्ष 1999 के विधानसभा चुनावों में नायडू ने टीडीपी गठबंधन के साथ 185 सीटों पर जीत हासिल करके अपनी पार्टी की जीत का नेतृत्व किया। वर्ष 2004 में, उनकी पार्टी को एक बड़ा झटका तब लगा था, जब वह केवल 49 सीटों पर ही जीत हासिल करने में कामयाब हो पाए थे। चंद्रबाबू नायडू ने अपनी पार्टी का फिर से गठन करने और मंच पर वापसी करने के लिए शपथ ली। टीडीपी ने 2009 के विधानसभा चुनावों में अपना बेहतर प्रदर्शन किया और कांग्रेस ने राज्य में सत्ता को बरकरार रखा। हालांकि, वर्ष 2014 के चुनावों में, चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा के साथ गठबंधन करके सत्ता में वापसी की थी।

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