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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Jun 13th, 06:54 by lovelesh shrivatri


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किसी भी व्‍यक्ति या संस्‍था का नाम पता, मोबाइल नंबर लोकेशन आदि की जानकारी किसी दूसरे के हाथ लग जाए तो खतरे हजार है। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं की ओर से जब यह जानकारी सामने आती है कि फेसबुक (मेटा) से करीब एक लाख यूजर्स के पर्सनल डेटा लीक हो गए है तो ऐसे खतरों को लेकर चिंता बढ़ना स्‍वाभाविक है। लीक हुआ यह डेटा बीच फोरम पर भी उपलब्‍ध बताया जा रहा है। जाहिर है, किसी भी प्‍लेटफार्म के माध्‍यम से व्‍यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक होने पर साइबर अपराधियों की सक्रियता बढ सकती है और प्रभावित लोग आसानी से साइबर क्राइम के शिकार भी हो सकते है।  
यह कोई पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म के जरिए लोगों की निजी जानकारी लीक होने के मामले सामने आए है। सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के दौर में व्‍यक्तियों और कंपनियों के डेटा बेशकीमती होते जा रहे है। इसलिए इन्‍हें सुरक्षित रखने के जितने उपाय किए जा रहे है उससे ज्‍यादा तकनीक का गलत इस्‍तेमाल इन्‍हें लीक करने में हो रहा है। हालांकि अभी यह सामने आना बाकी हैं कि यह किसी साइबर अपराधी समूह की कारगुजारी है अथवा इसके पीछे हैकर्स या फिर अन्‍य कोई संस्‍था है। लेकिन जिन फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारी इस तरह से लीक हुई है, वे फिशिंग हमले की आसान शिकार बन ही सकते है। दुनियाभर में बढ़ते साइबर हमलों के कारण इंटरनेट पर मौजूद निजी जानकारी के लीक होने या उसका दुरूपयोग किए जाने की चिंता अकेले भारत की ही हो, ऐसा नहीं है। दुनिया के तमाम देश डेटा के खतरों से आए दिन दो चार होते है। इंटरनेट के बढ़ते इस्‍तेमाल की कोई एक वजह नहीं है। आज के दौर में हर सुविधा के इस्‍तेमाल के लिए तकनीक का उपयोग जरूरी हो गया है। ऐसे में लोगों के डेटा सुरक्षित नहीं हो चिंता स्‍वाभाविक है। डेटा चोरी के साथ-साथ साइबर अपराध जिस तरह से चुनौती बनते रहे है, उसमें यह जरूरी हो गया है कि इनकी रोकथाम के उपाय भी मजबूती से हों। डिजिटल स्‍पेस में आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूजर्स का डेटा कितना सुरक्षित है।  

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