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Malti Computer Center Tikamgarh

created May 13th, 02:23 by Ram999


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इरोड वेंकट रामासामी पेरियार (17 सितम्बर, 1879-24 दिसम्बर, 1973) जिन्हे पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता था, बीसवीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता थे जो दलित-शोषित गरीबों के उत्थान के लिए कार्यरत रहे। इन्होंने जातिवादी गैर बराबरी वाले हिन्दुत्व का विरोध किया जो इनके अनुसार दलित समाज के उत्थान का एकमात्र विकल्प था।  पेरियार अपनी मान्यता का पालन करते हुए मृत्युपर्यंत जाति और हिंदू-धर्म से उत्पन्न असमानता और अन्याय का विरोध करते रहे। ऐसा करते हुए उन्होंने लंबा, सार्थक, सक्रिय और सोद्देश्यपूर्ण जीवन जीया था। पेरियार ऐसे क्रांतिकारी विचारक के रूप में जाने जाते थे जिन्होंने धार्मिक आडंबर और कर्मकांडों पर प्रहार किया था। उन्होंने तमिलनाडु में ब्राह्मणवादी प्रभुत्व और जाति अस्पृश्यता के खिलाफ विद्रोह किया।
अस्पृश्यता की कुप्रथा के विरुद्ध त्रावणकोर (केरल) में यह सत्याग्रह चलाया गया था। इसका उद्देश्य निम्न जाती लोगों एवं अछूतों द्वारा अहिंसक तरीके से त्रावणकोर के हिन्दू मंदिरों में प्रवेश तथा सार्वजनिक सड़कों पर अस्पृश्यों के चलने को लेकर त्रावणकोर के वायकोम नामक ग्राम में यह आंदोलन शुरू हुआ। उस समय अस्पृश्यता की जड़ें काफ़ी गहरी जमीं हुई थीं। यहाँ सवर्णों से निम्न वर्ग को दूरी बनाये रखनी होती थी। निम्न वर्ग के लोगों में एझवा और पुलैया जैसी कई अछूत जातियाँ शामिल थीं। 19वीं सदी के अंत तक केरल में नारायण गुरु, एन. कुमारन, टी. के. माधवन जैसे बुद्धिजीवियों ने छुआछूत के विरुद्ध आवाज उठाई।

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