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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Sep 28th, 10:27 by lucky shrivatri


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यदि कोई मजिस्‍ट्रेट ऐसे अपराध का परिवाद प्राप्‍त करने पर, जिसका संज्ञान करने के लिए वह प्राधिकृत है या जो धारा 192 के अधीन उसके हवाले किया गया है, ठीक समझता है तो ऐसे मामले में जहां अभियुक्‍त ऐसे किसी स्‍थान में निवास कर रहा है जो उस क्षेत्र से परे है जिसमें वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है। अभियुकत के विरूद्ध आदेशिका का जारी किया जाना मुल्‍तवी कर सकता है और यह विनिश्चित करने के प्रयोजन से कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्‍त आधार है अथवा नहीं, या तो स्‍वयं ही मामले की जॉच कर सकता है या किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या अन्‍य ऐसे व्‍यक्ति द्वारा जिसको वह ठीक समझे अन्‍वेषण किए जाने के लिए निदेश दे सकता है।  
जहां मजिस्‍ट्रेट को यह प्रतीत होता है वह अपराध जिसका परिवाद किया गया है अनन्‍यत: सेशन न्‍यायालय द्वारा विचारणीय है, जहां परिवाद किसी न्‍यायालय द्वारा नहीं किया गया है जब तक कि परिवादी की या उपस्थित साक्षियों की धारा 200 के अधीन शपथ पर परीक्षा नहीं ली जाती है। उपधारा (2) के अधीन किसी जांच में यदि मजिस्‍ट्रेट ठीक समझता है तो साक्षियों का शपथ पर साक्ष्‍य ले सकता है। यदि किसी छोटे अपराध का संज्ञान करने वाले मजिस्‍ट्रेट की राय में, मामले को धारा 260 के अधीन संक्षेपत: निपटाया जा सकता है  तो वह मजिस्‍ट्रेट उस दशा के सिवाय जहां उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जायेंगे उसकी प्रतिकूल राय है अभियुक्‍त से यह अपेक्षा करते हुए उसके लिए समन जारी करेगा कि वह विनिर्दिष्‍ट तारीख को मजिस्‍ट्रेट के समक्ष या तो स्‍वयं या प्‍लीडर द्वारा हाजिर हो या वह मजिस्‍ट्रेट के समक्ष हाजिर हुए बिना विनिर्दिष्‍ट जुर्माने की रकत डाक या संदेशावाहक द्वारा विनिदिष्‍ट तारीख के पूर्व भेज दे या यदि वह प्‍लीडर द्वारा हाजिर को अपनी और से आरोप के दोषी होने का अभिवचन करने के लिए लिखकर प्राधिकृत करे और ऐसे प्‍लीडर की मार्फत जुर्माने का संदाय करें।  

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