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ACADEMY FOR STENOGRAPHY, MORENA,DIR- BHADORIYA SIR TYPING MPHC DISTRICT COURT AG-3

created Sep 28th, 04:41 by ThakurAnilSinghBhado


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केंद्र सरकार ने बुधवार 28 सितंबर को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पी एफ आई और उसके सहयोगियों को गैरकानूनी घोषित करते हुए इन सभी पर पांच साल का बैन लगा दिया है। सरकार के आदेश के साथ ही पीएफआई को यू पी की धारा 35 के तहत 42 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में जोड़ा गया है। केंद्र ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यू पी 1967 के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को एक गैरकानूनी संघ घोषित किया है। जिसके बाद देश भर में केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राज्‍य पुलिस के पास अब संगठन के सदस्‍यों को गिरफ्तार करने, उसके खातों को फ्रीज करने और यहां तक कि उनकी संपत्ति को जब्‍त करने का अधिकार है। किसी संगठन को प्रतिबंधित करने या उसे आतंकी संगठन घोषित करने के बाद उसकी फंडिंग और उससे जुड़े लोग अपराधी बन जाते हैं। यू पी की धारा 38 के तहत, ऐसा व्‍यक्ति जो किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है, उसे एक से 10 साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजाएं हो सकती है। हालांकि, इससे उन लोगों को छूट दी गई है, जिन्‍होंने आतंकी संगठन घोषित होने से पहले ही संगठन छोड़ दिया था या फिर किसी गतिविधि में शामिल नहीं थे। फंडिंग करने पर 14 साल की कैद या जुर्माना वहीं, आतंकी संगठन की मदद करने वाले को 10 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। अगर कोई ऐसे संगठनों को फंडिंग करता है तो 14 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजा हो सकती है। यू पी की धारा 20 के मुताबिक, अगर कोई व्‍यक्ति किसी आतंकी गिरोह या आतंकी संगठन का सदस्‍य है तो उसे उम्रकैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। धारा 10 यह भी कहती है कि कोई भी व्‍यक्ति जो ऐसे संघ का सदस्‍य है या ऐसे संघ की बैठकों में भाग लेता है या इस तरह के संघ में योगदान देता है या किसी भी तरह से इस तरह के संघ के संचालन में सहायता करता है, उसे दो साल तक की कैद हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
 
 

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