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बंसोड कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 मो0नं0 8982805777 (CPCT, DCA, PGDCA & TALLY ) प्रवेश प्रारंभ

created May 14th, 05:47 by Vikram Thakre


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एक नमक बेचने वाला रोज अपने गधे पर नमक की थैली लेकर बाजार जाता था। रास्‍ते में उन्‍हें एक नदी पार करना पड़ता था। एक दिन नदी पार करते वक्‍त, गधा अचानक नदी में गिर गया और नमक की थैली भी पानी में गिर गई। चूँकि नमक से भरा थैला पानी में घुल गया और इसलिए थैला ले जाने के लिए बहुत हल्‍का हो गया। इसकी वजह से गधा बहुत ही खुश था। अब फिर गधा रोज वही चाल चलने लगा, इससे नमक बेचने वाले को काफी नुकसान उठाना पड़ता। नमक बेचने वाले को गधे की चाल समझ में गई और उसने उसे सबक सिखाने का फैसला किया। अगले दिन उसने गधे पर एक रुई से भरा थैला लाद दिया। अब गधे ने फिर से वही चाल चली। उसे उम्‍मीद थी कि रुई का थैला अभी भी हल्‍का हो जाएगा। लेकिन गीला रुई (कपास) ले जाने के लिए बहुत भारी हो गया और गधे को नुकसान उठाना पड़ा। उसने इससे  एक सबक सीखा। उस दिन के बाद उसने कोई चाल नहीं चली और नमक बेचने वाला खुश था। इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की भाग्‍य हमेशा साथ नहीं देता है, हमेशा हमें अपने बुद्धि का भी इस्‍तमाल करना चाहिए।

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