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ACADEMY FOR STENOGRAPHY, MORENA,DIR- BHADORIYA SIR TYPING MPHC JUNIOR JUDICIAL ASSISTANT

created Jan 25th, 10:39 by ThakurAnilSinghBhado


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अपीलार्थी उक्‍त रिपोर्ट से प्रकट होता है कि अभियोजन पक्ष का मामला इस प्रकार है कि अभियोजन साक्षी 6 ने तारीख 01/07/1991 को जांच करने पर यह पाया कि मैथिली (मृतक) बचपन से ही किसी के दौरों में पीडि़त थी। तारीख 01/07/1991 की सुबह को वह अपनी छम माह की बच्‍ची के साथ घर में अकेली थी अशोक उसका पति अपनी साइकिल की मरम्‍मत कराने के लिए नारायण सेठ की साइकिल मरम्‍मत करने वाली दूकान पर गया हुआ था। उसका श्‍वसुर और सास  भी 30/06/1991 की शाम के लगभग 3.30 बजे ईश्‍वर मिश्रा केक घर सांदीपल्‍ली गए हुए थे। पद्ममलोचन प्रधान नामक व्‍यक्ति ने जो कि अपने घर की खपरैल बलद रहा था, सुबह लगभग 7.30 बजे अभियुक्‍त के घर में आग देखी और वह शोर मचाता हुआ स्‍थल की ओर दौड़ा। गांव के लोगों के साथ मिलकर उसने आग बुझाई। अब वे अन्‍दर गए तब उन्‍होंने मैथिली को पूरी तरह झुलसा हुआ और मरा हुआ पाया। बच्‍ची बरामदे में एक चारपाई पर जीवित लेटी हुई थी। सभी गांव वालों ने यह बताया कि संभवत: घर अकस्‍मात आग लग जाने के कारण जल गया और मृतक के भाइयों सहित किसी भी व्‍यक्ति को मृत्‍यु समीक्षा के दौरान कोई संदेह नहीं हुआ। तारीख 24.07.1991 को अभियोजन साक्षी 10 की परीक्षा के दौरान जो कि पहले मौजूद नहीं था। तारीख 05/06/1991 को अशोक मृतक के साथ अभियोजन साक्षी 02 के घर आया था ओर और उन्‍होंने उससे 15,000 रुपये नकद देने की प्रार्थना की थी, जिसे उसकी ननद के लिए दहेज के रूप में और उसके पति की सलाह के अनुसार उसके पति को एक टी.वी. और एक मोअर साइकिल देने के खर्च किया जाना था। अभियोजन साक्षी 05 ने इसके लिए अपनी असमर्थता व्‍यक्‍त की। अशोक उसकी पुत्री को छोड़कर गुस्‍सा होकर वहां से चला गया तारीख 08.06.1991 को वह अपनी पुत्री के साथ वहां गया था और उसे(पुत्री को) अभियुक्‍त के मकान पर छोड़ आया था। तारीख 01/07/1991 को ललतेंदू बिसवाल और महिमुंडा के गगन बिहारी प्रधान उसके घर आए और उन्‍होंने यह सूचित किया कि अभियुक्‍त का घर पूरी तरह जल गया है।  

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