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created Oct 23rd, 02:04 by Ashu Soni


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भारत में कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा सौ करोड़ पार कर गया। यह मामूली उपलब्धि नहीं है। इससे आबादी का बड़ा हिस्‍सा महामारी के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित हुआ है। देश में टीकाकरण की शुरुआत इस साल सोलह जनवरी को हुई थी। साल के अंत यानी 31 दिसंबर 2021 तक पूरी आबादी को टीके की कम से कम एक-एक खुराक देने का लक्ष्‍य रखा गया था। तब लग रहा था कि कैसे यह संभव हो पाएगा। उस वक्‍त टीका निर्माता कंपनियों के पास पर्याप्‍त उत्‍पादन की क्षमता और सुविधा नहीं थी। फिर इतनी बड़ी आबादी के लिए टीकों का उत्‍पादन कोई मामूली काम नहीं था। लेकिन वक्‍त के साथ सभी के सहयोग से सारी चीजें पटरी पर आती गर्इं। कंपनियों ने उत्‍पादन बढ़ाने के उपाय किए, टीके बनाने के लिए नए संयंत्र भी लगे, विदेशी टीकों कोभी आपात इस्‍तेमाल की मंजूरी दी गई और सबसे बड़ी बात यह कि इस महाभियान को कामयाब बनाने के लिए चिकित्‍साकर्मियों ने अपने को इसमें पूरी ताकत से झोंक डाला। इसलिए अब 31 दिसंबर तक इस लक्ष्‍य को हासिल कर पाना कोई मुश्किल काम नहीं है। दुनिया में कोरोना की दस्‍तक के बाद तेजी से बढ़ती इसकी भयावहता को देख लग गया था कि जब तक इसका टीका विकसित नहीं हो जाता या दवा नहीं जाती, तब तक बचाव ही एकमात्र उपाय है। इसलिए देश-दुनिया के वैज्ञानिक टीके बनाने में जुट गए थे। अपने देश में भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से कोवैक्‍सीन तैयार किया। आक्‍सफोर्ड-एस्‍ट्रेजेनेका के बनाए टीके कोविशील्‍ड के उत्‍पादन की कमान भारतीय कंपनी सीरम इंस्‍टीट्यूट आफ इंडिया ने संभाली। इन दोनों कंपनियों को उत्‍पादन तेज करने के लिए सरकार ने आर्थिक मदद भी दी। और इस तरह इस 16 जनवरी को टीकाकरण का जो चुनौती भरा अभियान शुरू हुआ, वह आज सौ करोड़ से ऊपर निकल गया। सबसे पहले उन लाखों चिकित्‍साकर्मियों अन्‍य को टीका लगाने का लक्ष्‍य रखा गया जो देश को कोरोना से बचाने में जुटे थे। कुछ महीने बाद बुजुर्ग आबादी और फिर नौजवानों की बारी आई। अब अठारह साल से कम उम्र के बच्‍चों का भी टीकाकरण हो रहा है। हालांकि बीच-बीच में ऐसे मौके भी आते रहे जब टीकाकरण की रफ्तार धीमी पड़ी। टीकों की कमी, टीका बनाने में जरूरी कच्‍चे माल का संकट और कंपनियों की सीमित क्षमता जैसे कई कारण रहे। इससे एक बार तो लगने लगा था कि साल के आखिर तक पूरी आबादी के टीकाकरण का लक्ष्‍य हासिल हो भी पाएगा या नहीं। दूसरी लहर में भारत ने कोरोना का जो दंश झेला है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। रोजाना संक्रमण की दर और मौतों के मामले में हम अमेरिका तथा ब्राजील के बाद तीसरे स्थान पर थे।

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