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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤आपकी सफलता हमारा ध्‍येय✤|•༻

created Nov 24th 2020, 10:07 by Vivek Sen


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एक बार पिता और पुत्र जलमार्ग से यात्रा कर रहे थे, और दोनों रास्‍ता भटक गये वे दोनों एक जगह पहुंचे जहां दो टापू आस-पास थे, पिता ने पुत्र से कहा, अब लगता है हम दोनों का अंतिम समय गया है। दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है अचानक उन्‍हें एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि वैसे भी हमारा अंतिम समय नजदीक है तो क्‍यों हम ईश्‍वर की प्रार्थना करें उन्‍होंने दोनों टापू आपस में बांट लिए एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग ईश्‍वर की प्रार्थना करने लगे।
    पुत्र ने ईश्‍वर से कहा, हे भगवान इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें, प्रार्थना सुनी गयी, तत्‍काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी गये, उसने कहा ये तो चमत्‍कार हो गया, फिर उसने प्रार्थना की, एक सुंदर स्‍त्री जाए जिससे हम यहां उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएं, तत्‍काल एक सुंदर स्‍त्री प्रकट हो गयी। अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्‍यों ईश्‍वर से यहां से बाहर निकलने का रास्‍ता मांगे। उसने ऐसा ही किया उसने प्रार्थना की एक नाव जाए जिसमें सवार होकर हम यहां से बाहर निकल सकें, तत्‍काल नाव प्रकट हुई, और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा। तभी एक आकाशवाणी हुई बेटा तुम अकेले जा रहे हो। अपने पिता को साथ नहीं लोगे। तो पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, वो इसी लायक हैं, प्रार्थना तो उनने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी शायद उनका मन पवित्र नहीं है तो उन्‍हें इसका फल भोगने दो ना। आकाशवाणी कहती है बेटा, क्‍या तुम्‍हें पता हे, कि तुम्‍हारे पिता ने क्‍या प्रार्थना की पुत्र बोला नहीं तो सुनो, तुम्‍हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की, हे भगवान, मेरा बेटा आपसे जो मांगे, उसे दे देना।

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