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साई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Sep 19th, 10:32 by lucky shrivatri


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लक्ष्‍य ओझल होने पाये, कदम मिलाकर चल। सफलता तेरे पग चूमेगी, आज नही तो कल। अब्राहिम लिंकन नाम सारी दुनिया जानती है। इन्‍होंने गरीबी और प्रतिकूल परिस्थितियों  बाबजूद अब्राहिम लिंकन की मनोवृत्ति हमेशा ऊँची और सही थी। कुछ ऊँचा पाने की ललक में सभी मुश्किलों से लड़ते हुए विद्यासागर लैंप पोष्‍ट ने नीचे बैठकर पढ़ते थे। और एक दिन उन्‍होंने शिक्षा की ऊंचाइयों को पाया।    
सफलता प्राप्‍त करने के लिए हमें लक्ष्‍य की आश्‍यकता होती है, यदि हम दृढ़ संकल्‍प कर लें तो हमें अपने लक्ष्‍य की प्राप्ति अवश्‍य होगी। प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी जिन्‍दगी में कुछ कुछ बनना चाहते है। कोई इंजीनियर बनना चाहता है, तो कोई डाक्‍टर, कोई सैनिक, कोई शिक्षक बनना चाहता है। इस प्रकार बचपन से ही बालक तथा बालिकायें अपना लक्ष्‍य निर्धारित कर अपने भविष्‍य की कल्‍पना करते है। खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। यह सच है। अपने आपको कमजोर समझोगे उतना ही लक्ष्‍य आपसे दूर होगा। हम जो पाना चाहते है उसके लिए जुनून, अपने लक्ष्‍य पर नजरें टिकाये रखने के लिए पर्याप्‍त जुनून और उस लक्ष्‍य को साकार होते देखने के लिए पूरा जुनून होना चाहिए। विद्यार्थी को हमेशा सकारात्‍मक सोचना चाहिए और मैं कर सकती हूँ, मुझे करना चाहिए, और मैं करूंगी सोचना चाहिये। कभी भी नकारात्‍मक नहीं सोचना चाहिए।  
यदि हम अपने लक्ष पर दृढ़ हैं तो हमें सफलता अवश्‍य मिलेगी। यदि हम असफल हो जायें तो हम हार मान लेते है। लेकिन यदि हम उसी कार्य को बार-बार करें तो अंत में लक्ष की प्राप्ति होती है।
 

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