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साँई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Jul 21st, 10:08 by sandhya shrivatri


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बनी खरगोश जंगल में रहता था। उसके कई दोस्‍त थे। उसे अपने दोस्‍तो पर गर्व था। एक दिन बनी खरगोश ने जंगली कुत्‍तों के जोर से भौंकने की आवाज सुनी। वह बहुत डरा हुआ था। उसने मदद मांगने का फैसला किया। वह जल्‍दी से अपने मित्र हिरण के पास गया। उन्‍होंने कहा, प्रिय मित्र, कुछ जंगली कुत्‍ते मेरा पीछा कर रहे है। क्‍या आप उन्‍हें अपने तीखे एंटीलर्स से दूर कर सकते है? हिरन ने कहा, यह सही है, मैं कर सकता हूं। लेकिन अभी मैं व्‍यस्‍त हूं।  
आपने मदद क्‍यों मागी- बनी खरगोश भालू के  पास दौड़ा। मेरे प्‍यारे दोस्‍त, आप बहुत मजबूत है। कृपया मेरी सहायता करे। कुछ जंगली कुत्‍ते मेरे पीछे हैं। कृपया उनका पीछा करे उन्‍होंने अनुरोध किया। भालू ने उत्‍तर दिया मुझे क्षमा करें। मैं भूखा और थका हुआ हूं। मुझे कुछ खाने को खोजने की जरूरत है। कृपया मदद के लिए बंदर से पूछे। बेचारी बनी बंदर के पास गई, हाथी, बकरी और उसके उन्‍य सभी दोस्‍त।  
बनी को दु:ख हुआ कि कोई भी उसकी मदद करने के लिए तैयार नहीं था। वह समझ गया कि उसे खुद से बाहर निकलने का रास्‍ता सोचना होगा। वह एक झाड़ी के नीचे छिप गया। वह बहुत स्थिर था। जंगली कुत्‍तों को बन्‍नी नहीं मिली। वे अन्‍य जानवरों का पीछा करते हुए चले गए। बनी खरगोश ने सीखा कि उसे खुद से जीवित रहना सीखना था, उसके अनछुए दोस्‍तों पर निर्भर नही।  

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